धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सहयोग से “डब्ल्यूटीओ और डिजिटल व्यापार” पुस्तक का भव्य विमोचन

नई दिल्ली,:डब्ल्यूटीओ अध्ययन केंद्र (CWS) एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अनुसंधान केंद्र (CRIT), भारतीय विदेशी व्यापार संस्थान (IIFT) द्वारा धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (DNLU), जबलपुर के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश विधि अध्ययन केंद्र (CITIL) के सहयोग से “डब्ल्यूटीओ और डिजिटल व्यापार” शीर्षक पुस्तक का विमोचन नई दिल्ली के प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (तीन मूर्ति भवन) में आयोजित भव्य समारोह में किया गया। इस पुस्तक का प्रकाशन ब्लूम्सबरी इंडिया ने किया है।

मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान (सुप्रीम कोर्ट, भारत) तथा विशिष्ट अतिथि माननीय न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन (अध्यक्ष, सशस्त्र बल न्यायाधिकरण, नई दिल्ली) और प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार सिन्हा (कुलपति, DNLU जबलपुर) ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर IIFT के कुलपति प्रो. (डॉ.) राकेश मोहन जोशी, भारतीय विधि संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) वी. के. आहूजा और महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, मुंबई के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिलीप उके सहित अनेक प्रतिष्ठित विद्वान उपस्थित रहे।

Grand launch of the book “WTO and Digital Trade” in association with Dharmashastra National Law University

अपने उद्घाटन भाषण में जस्टिस भुयान ने डिजिटल व्यापार की परिवर्तनकारी क्षमता पर विचार व्यक्त करते हुए संप्रभुता, गोपनीयता और निष्पक्षता जैसे मुद्दों पर संतुलन की आवश्यकता बताई। वहीं जस्टिस मेनन ने डिजिटलीकरण को नियंत्रित करने के लिए विधिक तैयारी और अभिनव ढांचे की महत्ता पर जोर दिया।

पुस्तक के संपादक डॉ. प्रीतम बनर्जी (CWS प्रमुख) और श्री उत्कर्ष के. मिश्रा (निदेशक, CITIL, DNLU) हैं। संपादन में DNLU कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार सिन्हा, ICRIER की प्रो. (डॉ.) अर्पिता मुखर्जी, CRIT प्रमुख प्रो. (डॉ.) मुरली कल्लमल और वरिष्ठ नीति सलाहकार श्री दीपक माहेश्वरी का मार्गदर्शन रहा। प्रबंध संपादक के रूप में डॉ. अमित रानदेव और मोनिका ने योगदान दिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पैनल चर्चा रही, जिसका संचालन डॉ. प्रीतम बनर्जी ने किया। इसमें प्रो. अभिजीत दास, प्रो. (डॉ.) मुरली कल्लमल, प्रो. (डॉ.) जेम्स जे. नेदुमपारा, श्री दीपक माहेश्वरी और डॉ. गर्गी चक्रवर्ती ने भाग लेकर विकासशील देशों के लिए नीतिगत अवसर, डिजिटल संप्रभुता, साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, बौद्धिक संपदा और डिजिटल व्यापार के लैंगिक पहलुओं पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

पुस्तक में डब्ल्यूटीओ ढांचे के तहत डिजिटल व्यापार की परिभाषा, डेटा प्रवाह व गोपनीयता, कराधान, ई-कॉमर्स वार्ता, डिजिटल विभाजन तथा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय नीतियों की पूरकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम का सफल संचालन व समन्वय डॉ. अमित रानदेव और मोनिका ने किया। इस विमोचन ने न केवल डिजिटल व्यापार के वैश्विक महत्व को रेखांकित किया, बल्कि भारत की नीतिगत और बौद्धिक नेतृत्व क्षमता को भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com