शेखावाटी विश्वविद्यालय प्रकाशित करेगा ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ पर आधारित पुस्तकें

पुस्तक प्रकाशन और संपादन की कार्ययोजना बनाने के लिए हुई अहम बैठक

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकों की कमी पूरी होगी – कुलगुरु प्रो अनिल राय

सीकर : पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर की ओर से भारतीय संस्कृति और प्राचीन परंपराओं को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने के उद्देश्य से ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ पर आधारित विशेष पुस्तकों का प्रकाशन और संपादन किया जाएगा। शेखावाटी विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रो अनिल कुमार राय ने बताया कि ये पुस्तकें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्नातकोत्तर और स्नातक के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी रहेगी। इन पुस्तकों में वैदिक काल से आधुनिक युग तक की भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रमाणिक तथ्यों के साथ सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाएगा।

Pandit Dindayal Upaddhyay Shekhawati University Sikar

प्रो राय ने बताया कि पुस्तकों के प्रकाशन और संपादन का कार्य विशेषज्ञों की देखरेख में किया जाएगा। यह प्रयास नई शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय मूल्यों और परंपराओं को शैक्षणिक ढांचे में पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय संस्कृति और परंपरा को जीवंत रखने और नई पीढ़ी को उससे जोड़ने की दिशा में सराहनीय प्रयास है।

कुलगुरु प्रो अनिल राय ने बताया कि पुस्तक प्रकाशन की योजना और सुझाव प्रस्तुत करने के लिए हाल ही विशेषज्ञों, अधिकारियों और संकाय सदस्यों की अहम बैठक आयोजित की गई। इसमें पुस्तक प्रकाशन पर गहन चिंतन और विस्तृत रूपरेखा बनाई गई। बैठक में शिक्षाविद् प्रो अरविंद अग्रवाल, जयपुर, प्रो राजीव सक्सेना, जयपुर, प्रो मथुरेश्वर पारीक, डिप्टी रजिस्ट्रार (संबद्धता) डॉ रविंद्र कुमार कटेवा, ​असिस्टेंट रजिस्ट्रार परीक्षा डॉ संजीव कुमार समेत समस्त संकाय सदस्य उपस्थित थे।

ग्रंथमाला का प्रकाशन फायदेमंद – कुलगुरु प्रो राय

बैठक में कुलगुरु प्रो अनिल कुमार राय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पुस्तकों के प्रकाशन की आवश्यकता और महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुसार ग्रंथमाला का प्रकाशन विद्यार्थियों के लिए फायदेमंद रहेगा। प्रो अरविंद अग्रवाल ने सुझाव दिया कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को अपना प्रकाशन केन्द्र खोलना चाहिए। इससे ज्ञान का सृजन पुस्तक प्रकाशन के रूप में होगा।

प्रो राजीव सक्सेना और प्रो मथुरेश्वर पारीक ने कहा कि शेखावाटी में शिक्षा स्तर अच्छा होने के कारण इन शिक्षा नीति के अनुसार पुस्तकों का प्रकाशन बहुत जरूरी है। इससे भारतीय ज्ञान परंपरा और पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकों की कमी पूरी होगी। कुलगुरु प्रोफेसर अनिल कुमार राय ने बताया कि ये पुस्तकें भारतीय ज्ञान की विविध शाखाओं – जैसे भारतीय संस्कृति, दर्शन, जनसंचार एवं पत्रकारिता, गणित, योग,ज्योतिष, शिक्षा, साहित्य और कला—को समाहित करेगी।

विशेषज्ञों में ये हैं शामिल

इस प्रकाशन योजना का संयोजक डॉ राजेंद्र सिंह (निदेशक, अकादमिक और शोध) को बनाया गया है। विशेषज्ञों में शिक्षाविद् प्रो अरविंद अग्रवाल, जयपुर, प्रो राजीव सक्सेना, जयपुर, प्रो मथुरेश्वर पारीक, जयपुर, डॉ नकुलेश्वर दत्त जसूजा जयपुर, डॉ चेतन जोशी, सीकर और डॉ मुकेश शर्मा, सीकर शामिल है।

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