इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के गणित विभाग को राष्ट्रीय सफलता

ANRF ने शोध परियोजना को दी मंजूरी

रेवाड़ी l CampusKatta Desk : इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (IGU), मीरपुर, रेवाड़ी के लिए यह अत्यंत गर्व और हर्ष का विषय है कि विश्वविद्यालय के गणित विभाग को अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सफलता प्राप्त हुई है। राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) द्वारा गणित विभाग की शोध परियोजना को वित्तीय सहायता के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है।

स्वीकृत परियोजना का शीर्षक है “Predictive Modeling of Wave Dynamics in Nonlocal and Anisotropic Smart Materials”, जिसे ARG-MATRICS कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित किया गया है।

इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के गणित विभाग को राष्ट्रीय सफलता

5 वर्षों तक चलेगा अनुसंधान, मिलेगा वार्षिक अनुदान

इस प्रतिष्ठित शोध परियोजना के प्रमुख अन्वेषक (Principal Investigator) हैं डॉ. महाबीर बड़क। उनके नेतृत्व में यह परियोजना 60 माह (5 वर्ष) की अवधि में पूर्ण की जाएगी।

परियोजना के अंतर्गत:

  • ₹5 लाख प्रति वर्ष अनुसंधान अनुदान
  • ₹1 लाख प्रति वर्ष ओवरहेड्स
    प्रदान किए जाएंगे।

स्मार्ट मटेरियल्स और उन्नत तकनीक में होगा बड़ा योगदान

डॉ. महाबीर बड़क ने बताया कि इस शोध का मुख्य उद्देश्य नॉन-लोकल एवं एनीसोट्रॉपिक स्मार्ट मटेरियल्स में Wave Dynamics के व्यवहार के लिए पूर्वानुमानात्मक मॉडल विकसित करना है।

यह अनुसंधान निम्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देगा:

  • उन्नत सामग्री विज्ञान (Advanced Material Science)
  • इंजीनियरिंग एवं रक्षा प्रौद्योगिकी
  • सेंसर तकनीक
  • स्मार्ट संरचनाओं (Smart Structures) का विकास

विशेषज्ञों के अनुसार, यह शोध सैद्धांतिक एवं अनुप्रयुक्त गणित को सशक्त करने के साथ-साथ भारत को स्मार्ट मटेरियल्स आधारित तकनीकों के वैश्विक मंच पर एक मजबूत पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगा।


कुलपति ने बताया विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि

कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता न केवल गणित विभाग, बल्कि सम्पूर्ण इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय और क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। इससे भविष्य में उच्चस्तरीय अनुसंधान गतिविधियों को नई दिशा और प्रोत्साहन मिलेगा।

इस उपलब्धि से आईजीयू की शैक्षणिक एवं अनुसंधान प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊँचाई प्राप्त हुई है। विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों और शोधार्थियों ने भी इस सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे एक प्रेरणास्रोत बताया हैl

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