इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय ने किया टेरेस किचन गार्डनिंग
पर्यावरण संरक्षण के प्रति किया जागरूक
रेवाड़ी | मीरपुर
पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर (रेवाड़ी) के पर्यावरण विज्ञान विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, रेवाड़ी टीम के संयुक्त सहयोग से एक प्रेरणादायक टेरेस किचन गार्डनिंग पहल का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बाबा फरीद सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित वृद्ध आश्रम परिसर में आयोजित हुआ।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य सीमित स्थान में सब्ज़ी उत्पादन की व्यवहारिक संभावनाओं को प्रदर्शित करना तथा समाज को स्वास्थ्यवर्धक, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
सब्ज़ी व पौधारोपण से हरित पहल
कार्यक्रम के अंतर्गत बैंगन, टमाटर, मिर्च और शिमला मिर्च की पौध एवं बीज रोपण किया गया। इसके साथ ही धनिया और पालक की बुवाई की गई।
सर्दी के मौसम को ध्यान में रखते हुए विभिन्न फूलों के पौधों के साथ-साथ गुड़हल और गुलाब के पौधे भी लगाए गए, जिससे वृद्ध आश्रम परिसर को हरित और सौंदर्यपूर्ण स्वरूप प्रदान किया जा सके।

जैविक कचरे से खाद बनाने की जानकारी
इस अवसर पर आश्रम की रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे से कम्पोस्ट तैयार करने की सरल एवं वैज्ञानिक विधि की जानकारी भी दी गई। इससे न केवल जैविक कचरे का समुचित प्रबंधन संभव होगा, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुमन नागपाल ने किचन गार्डनिंग, जैविक खाद निर्माण और सतत विकास के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पहल वृद्धजनों को प्रकृति से जोड़ने के साथ-साथ समाज में आत्मनिर्भरता, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।
उन्होंने आम नागरिकों से भी अपने घरों में किचन गार्डन अपनाने और जैविक कचरे से खाद बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति
कार्यक्रम में इंजीनियर सोनिया नाहर, शोधार्थी देवानंद एवं राहुल, जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार तथा पर्यावरण संरक्षण गतिविधि से एकता कौशिक की विशेष उपस्थिति एवं सक्रिय सहभागिता रही।
