महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर संगोष्ठी
“महिलाएं पुरुषों से आगे निकल रही हैं” — महिला दिवस संगोष्ठी में विद्वानों ने किया विचार-विमर्श
वाराणसी, : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में सेवाज्ञ संस्थानम् के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का संचालन सोनी शर्मा ने किया, जिसका शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सम्मान समारोह के साथ हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. स्वाति एस. मिश्रा, डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह, डॉ. हरेंद्र राय और डॉ. कुमकुम पाठक ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
डॉ. कुमकुम पाठक ने अपने व्याख्यान में वैदिक वाङ्मय के इतिहास को नारीवादी परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति का सर्वोच्च उदाहरण झांसी की रानी हैं, जो साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक हैं। उन्होंने देवी काली को नारी शक्ति का प्रतीक बताते हुए कहा कि वैदिक काल से ही नारी को देवी के रूप में देखा गया है।

डॉ. पाठक ने यजुर्वेद और ऋग्वेद के नारी सूक्त एवं श्लोकों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वेदों में नारी को सहस्त्र वीर्या (अपार शक्ति) तथा ओजस्विता कहा गया है, जो पुरुषों के समान अधिकार व सम्मान को दर्शाता है।
प्रमुख वक्ता डॉ. स्वाति एस. मिश्रा ने नारीवाद के सामाजिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि “नारीवाद” शब्द की उत्पत्ति पाश्चात्य संस्कृति से हुई है, जिसका उदय अमेरिका में हुआ और यूरोप के माध्यम से संपूर्ण विश्व में इसका प्रसार हुआ। उन्होंने नारीवाद के पहली से चौथी लहर तक के क्रमिक विकास को स्पष्ट करते हुए कहा कि आज नारीवाद के चौथे चरण में हम महिलाओं की स्थिति में हो रहे बदलाव को देख रहे हैं।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि समाज में स्तरीकरण (stratification) आज भी मौजूद है, लेकिन आने वाले समय में इसमें सकारात्मक बदलाव की आशा है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. हरेंद्र राय ने अपने उद्बोधन में संयुक्त परिवार के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नारी के बिना समाज और संसार की कल्पना असंभव है। डॉ. राय ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के मित्रवत व्यवहार अपनाकर उनकी परवरिश करें ताकि बच्चों में आत्मविश्वास और सामाजिक मूल्यों का विकास हो सके।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि नारी स्वयं में शक्ति का प्रतीक हैं और उन्हें किसी विशेष दिवस की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल संगोष्ठियों से समाज में बदलाव संभव नहीं है, इसके लिए समाज को सक्रिय भागीदारी और निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है।
संगोष्ठी में उपस्थित सभी गणमान्यजनों ने महिला सशक्तिकरण एवं समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता पर बल दिया।