एचएनएलयू में राष्ट्रीय सम्मेलन: “न्याय वितरण तंत्र और संस्थागत क्षमता” पर व्यापक विमर्श

रायपुर : हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू), रायपुर ने सेंटर फॉर सोशल जस्टिस (CSJ) और इंडिया जस्टिस रिपोर्ट (IJR) के सहयोग से “जस्टिस डिलीवरी मैकेनिज़्म एंड इंस्टीट्यूशनल कैपेसिटी” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में पुलिस, न्यायपालिका, कारागार और विधिक सहायता—इन चार स्तंभों की चुनौतियों और अवसरों पर विस्तृत चर्चा की गई। देशभर के 55 से अधिक प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया।


उद्घाटन सत्र

कार्यक्रम का शुभारंभ सुश्री नूपुर (CSJ) द्वारा CSJ रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत करने से हुआ।
श्री वलय सिंह (IJR) ने इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025 की राज्यवार न्यायिक क्षमता का तुलनात्मक विश्लेषण साझा किया।

कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानंदन ने कहा कि कानून विश्वविद्यालय न्यायिक सुधार और क्षमता निर्माण के महत्वपूर्ण catalyst हैं। उन्होंने प्रशिक्षण, विधिक सहायता और क्लिनिकल शिक्षा को आवश्यक बताया।

इस मौके पर CSJ की नई रिपोर्ट का विमोचन कुलपति द्वारा किया गया।


मुख्य पैनल चर्चाएं

पैनल I: न्यायिक क्षमता व विधिक सहायता

संयोजक: प्रो. विष्णु कोनूरायर

  • श्री पार्थ तिवारी (छ.ग. SLSA): विधिक सहायता क्लीनिकों और पैरालीगल वालंटियर्स की भूमिका महत्वपूर्ण।
  • सुश्री नूपुर (CSJ): पूर्णकालिक विधिक सहायता वकीलों की जरूरत।
  • श्री वलय सिंह (IJR): न्यायपालिका, पुलिस, कारागार व विधिक सहायता की तुलनात्मक समीक्षा।
  • विशेषज्ञों का मत: मानव संसाधन और विधि विद्यालयों की भूमिका अहम।

पैनल II: Policing for People

संयोजक: डॉ. अर्चना घरोटे

  • डॉ. विपुल मुद्गल (कॉमन कॉज़): Policing in India Report 2025 के आधार पर हिरासत में यातना और नए आपराधिक कानूनों के तहत क्षमता निर्माण की आवश्यकता।
  • डॉ. डी.के. श्रीवास्तव (HNLU): पुलिस प्रशिक्षण में विश्वविद्यालय की भूमिका।
  • डॉ. परवेश राजपूत (HNLU): प्रो बोनो क्लब की प्रशिक्षण और सुधार पहलों की जानकारी।

पैनल III: कारागार व्यवस्था और न्यायिक क्षमता

संयोजक: श्री अभिनव शुक्ला

  • श्री सुनील गुप्ता, लेखक ब्लैक वॉरंट: कारागार प्रशासन की जमीनी चुनौतियों पर प्रकाश।
  • सुश्री सरब लांबा (IJR): जेल क्षमता, भीड़भाड़ और कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर रिपोर्ट।
  • डॉ. उपनीत लल्ली: जेलों में लिंग-संवेदनशील नीतियों और विधिक सहायता की आवश्यकता पर जोर।

समापन

समस्त चर्चाओं का सार डॉ. कौमुदी चल्ला ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का समापन डॉ. किरण कोरी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
सत्रों का संचालन श्री जीवन सागर, डॉ. इरिट्रिया रॉय, सुश्री अपूर्वा शर्मा और श्री पिंटू माझी ने किया।

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