जैन विश्वभारती संस्थान में मकर संक्रांति पर्व के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रम
विद्यार्थियों को बताया गया मकर संक्रांति पर्व का सांस्कृतिक व वैज्ञानिक महत्व
लाडनूं | जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग में मकर संक्रांति पर्व के उपलक्ष्य में एक सांस्कृतिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मकर संक्रांति के सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व से अवगत कराना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने कहा कि मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जो मानव जीवन में अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि यह पर्व त्याग, संयम, सद्भाव और सामाजिक समरसता का संदेश देता है तथा भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक चेतना को दर्शाता है।

इस अवसर पर डॉ. आभा सिंह ने मकर संक्रांति को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्रकृति और मानव जीवन के संतुलन से जोड़ते हुए इसे सकारात्मक ऊर्जा और नवचेतना का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व ऋतु परिवर्तन और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का प्रतीक है।
कार्यक्रम में छात्राओं निकिता स्वामी, मुस्कान और मानसी ने अपने विचारों एवं प्रस्तुतियों के माध्यम से मकर संक्रांति के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ समन्वयक डॉ. गिरधारी लाल शर्मा ने मकर संक्रांति के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए किया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति का यह पावन पर्व सूर्य उपासना, प्रकृति और मानव जीवन के संतुलन को दर्शाता है। अंत में उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में शिक्षा संकाय के सदस्य डॉ. अमिता जैन, डॉ. देवीलाल कुमावत, डॉ. गिरिराज भोजक, स्नेहा शर्मा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।