राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ भव्य उद्घाटन
राजस्थान / अजमेर :”हमारे समाज और संस्थानों में नेतृत्व वाले क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की अत्यंत आवश्यकता है। महिलाओं को यह समझना होगा कि सबसे पहली चुनौती उनके भीतर ही है। स्वयं आगे बढ़ें, स्वयं को बदलें, और दूसरों के लिए प्रेरणा बनें।” यह बात राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के महिला प्रकोष्ठ द्वारा “विमेन इन डिसीजन-मेकिंग एंड लीडरशिप: शैटरिंग स्टीरियोटाइप्स एंड क्रिएटिंग फ्यूचर्स” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि डीआरडीओ की महानिदेशक (पीसी एवं एसआई) डॉ. चंद्रिका कौशिक ने सभा को संबोधित करते हुए कही।
यह दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के नेतृत्व मे व भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के सहयोग से किया जा रहा है।
डॉ. चंद्रिका कौशिक ने आगे कहा कि – नेतृत्व का अर्थ केवल लक्ष्य तय करना नहीं है, बल्कि उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना, प्रेरित करना और मार्गदर्शन करना है। उन्होंने महिलाओं के नेतृत्व को मजबूत बनाने के लिए भावनात्मक बुद्धिमत्ता, समस्या समाधान क्षमता, रचनात्मकता और साहस को अनिवार्य बताया। साथ ही कौशिक ने बताया कि समाज में समानता स्थापित करने, नीतियों को बेहतर बनाने और संगठनात्मक प्रदर्शन को मजबूत करने के लिए महिलाओं की भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत की महिलाओं ने भारतीय संविधान का मसौदा तैयार करने में मदद की हैं। हमें संविधान के 75 वर्षों पर उनके योगदान को याद करना चाहिए। भावनात्मक बुद्धिमत्ता, सहयोगात्मक दृष्टिकोण, प्रभावी संवाद कौशल, मजबूत सहनशक्ति, बहु-कार्य क्षमता और विभिन्न दृष्टिकोणों की विविधता जैसे विषय महिलाओं को सशक्त और नेतृत्वकर्ता बनाता हैं।
डॉ. कौशिक ने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे आत्मविश्वास बनाए रखें, एक-दूसरे का समर्थन करें और कठिन भूमिकाओं के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा, हम महिलाओं को न केवल नेतृत्व करना है, बल्कि समाज में बदलाव की प्रेरणा भी बनना है।
महिलाओं को नेतृत्व की मुख्यधारा में लाने का आह्वान करते हुए उद्घाटन समारोह की विशिष्ट अतिथि राजस्थान सरकार की पूर्व मुख्य सचिव आईएएस उषा शर्मा ने अपने प्रेरणादायक अभिभाषण में कहा कि सभी पुरुषों को यह समझने की आवश्यकता है कि महिलाएं जनसंख्या का समान हिस्सा हैं और उनके प्रति अधिक जिम्मेदारीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बदलाव आ रहा है और परिस्थितियाँ बेहतर हो रही हैं, लेकिन अभी भी हमें एक लंबा सफर तय करना है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुरुषों को महिलाओं के अस्तित्व का सम्मान करना होगा, तभी समाज में वास्तविक बदलाव संभव हो पाएगा। अपने आईएएस अधिकारी के रूप में अनुभव साझा करते हुए, उन्होंने कई प्रेरणादायक कहानियां सुनाईं और यह संदेश दिया कि महिलाओं को निर्णय निर्माण की प्रक्रिया में आगे आना चाहिए। महिलाओं को यह दिखाना होगा कि आप क्या करने में सक्षम हैं। आपको उन भूमिकाओं को अपनाना होगा जो चुनौतीपूर्ण हों।” उन्होंने कहा कि महिलाओं को उद्यमिता कौशल विकसित करने और उसे बढ़ावा देने की आवश्यकता है। अपनी शक्ति और सामर्थ्य को पहचानें, क्योंकि महिलाएं समाज में समान भागीदार हैं।
इस अवसर पर राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आनंद भालेराव ने अपने अध्यक्षीय संबोधन के दौरान कई सफल महिलाओं की प्रेरक कहानियों को साझा किया, जिन्होंने अपने कठिन संघर्षों और अद्वितीय उपलब्धियों से समाज में मिसाल कायम की है। उन्होंने विश्वविद्यालय में आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं के लिए खाटू श्याम समिति द्वारा दी जा रही छात्रवृति का उल्लेख करते हुए इसे महिला शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

कुलपति महोदय ने ‘व्हेन वीमेन लीड’ पुस्तक का भी उल्लेख किया और उपस्थित सभी को इसे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि महिलाओं के नेतृत्व की अनोखी ताकत और दृष्टिकोण को समझा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता से खुद को साबित किया है, चाहे वह विज्ञान, प्रशासन, खेल, या उद्यमिता हो। उनके योगदान को पहचानना और उनका समर्थन करना समाज की प्रगति के लिए अनिवार्य है।
इस अवसर पर कुलपति ने सभी विशिष्ट अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत भी किया। कुलपति ने मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि को शॉल, स्मृति चिन्ह और श्रीमद भगवद गीता देकर सम्मानित किया। इससे पूर्व महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष और दो दिवसीय सम्मेलन की संयोजक डॉ. प्रगति जैन ने सभी का स्वागत किया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन सम्मेलन की आयोजन सचिव डॉ. गरिमा कौशिक ने किया। उद्घाटन समारोह का संचालन विश्वविद्यालय की जनसम्पर्क अधिकारी अनुराधा मित्तल ने किया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “विमेन लीडरशिप इन डायवर्स एरेनास टू फोस्टर क्रिएटिविटी एंड इम्प्रूव डिसीजन-मेकिंग” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा रही। इस चर्चा में प्रतिष्ठित पैनलिस्ट प्रो. (सेवानिवृत्त) बख्तावर एस. महाजन, अध्यक्ष, बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज, भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ (आईडब्ल्यूएसए), सुश्री मालिनी अग्रवाल, आईपीएस, एडीजीपी, नागरिक अधिकार और मानव तस्करी विरोधी, राजस्थान पुलिस, जोयिता मंडल, भारत की पहली ट्रांसजेंडर जज, और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट प्रदनया देशपांडे ने अपने विचार साझा किए।
इस पैनल चर्चा में विविध क्षेत्रों से आई प्रतिष्ठित हस्तियों ने अपने अनुभव साझा किए और महिला नेतृत्व की भूमिका पर गहन विचार प्रस्तुत किए। चर्चा ने रचनात्मकता और प्रभावी निर्णय-निर्माण में महिलाओं के योगदान को प्रेरित करने का संदेश दिया। इस चर्चा में डॉ तुलसी गिरी गोस्वामी ने सशक्त मॉडरेटर की भूमिका निभाई, जिन्होंने संवाद को और अधिक प्रभावी और विचारोत्तेजक बनाया।
कार्यक्रम के महत्व को बढ़ाते हुए, भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ (आईडब्ल्यूएसए) की अजमेर शाखा का औपचारिक उद्घाटन आईडब्ल्यूएसए मुख्यालय, मुंबई के प्रतिनिधियों द्वारा इस विशेष अवसर पर किया गया।
पहले दिन के पहले सत्र में ” स्टेम रिसर्च-बैरियर्स फेस्ड बाय वूमन इन प्राइवेट सेक्टर एक्सप्लोरिंग द वे आउट” विषय पर चर्चा हुई। इसके बाद दूसरे सत्र में ” वूमेन इन द फील्ड ऑफ अर्थ साइंस” विषय पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

ओरल प्रेजेंटेशन सेशन में विभिन्न विषयों जैसे एंपावरिंग वूमेन लीडरशिप इन हायर एजुकेशन इन इंडिया : बैरियर्स एंड इंनबलर्स, नारी शक्ति बंधन ए लीगल फ्रेमवर्क फॉर वूमेन लीडरशिप एंड एंपावरमेंट, लीडरशिप एंड डिसीजन मेकिंग अमोंग वूमेन एक्रॉस रोल्स इन यूनिवर्सिटी इकोसिस्टम जैसे विषयों पर सारगर्भित रूप से चर्चा का आयोजन किया गया।
दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के महिला प्रकोष्ठ द्वारा संयोजक डॉ. प्रगति जैन, सह-संयोजक डॉ. तुलसी गिरी गोस्वामी और आयोजन सचिव डॉ. गरिमा कौशिक के नेतृत्व में समर्पित टीम द्वारा आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन में 70 शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं, साथ ही प्लेनरी चर्चा, आमंत्रित व्याख्यान और अन्य महत्वपूर्ण सत्रों का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दूसरे दिन डिजिटल एंपावरमेंट शेपिंग ए फ्यूचर वेयर वूमन लीड द वे और एंपावरमेंट ऑफ ट्राइबल वूमेन थ्रू डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन अंडर फूलों जानो आशीर्वाद अभियान प्रोग्राम जैसे कई रोचक विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विचार साझा किए जाएंगे।