काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) मे मिर्गी के प्रति निकाली जागरूकता रैली

मिर्गी के इलाज और मरीजों के प्रति सहानुभूति का संदेश

उत्तर प्रदेशवाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) के न्यूरोलॉजी विभाग ने सोमवार को “बैगनी बनारस” अभियान के तहत मिर्गी के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक रैली का आयोजन किया। रैली का शुभारंभ आईएमएस निदेशक प्रोफेसर एस. शंखवार द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया, जबकि इसका नेतृत्व न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर विजयनाथ मिश्र ने किया। रैली में विभाग के सीनियर और जूनियर डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और छात्रों ने भाग लिया, जिन्होंने बैगनी रंग की टी-शर्ट पहनकर अस्पताल में आने वाले मरीजों को “मिर्गी नहीं है लाइलाज” का संदेश दिया। इस अवसर पर, प्रोफेसर आर. एन. चौरसिया, प्रोफेसर दीपिका जोशी, डॉक्टर आनंद, डॉक्टर वरुण, और प्रोफेसर रोयाना सिंह जैसे कई चिकित्सक भी मौजूद थे। रैली का उद्देश्य मिर्गी के बारे में समाज में जागरूकता फैलाना था, ताकि लोग मिर्गी के मरीजों के प्रति सहानुभूति दिखाएं और गलत धारणाओं को समाप्त करें।

Epilepsy awareness rally held at Banaras Hindu University (BHU)

प्रोफेसर विजयनाथ मिश्र ने किया जागरूकता कार्यक्रम का विस्तार
प्रोफेसर विजयनाथ मिश्र ने रैली के दौरान मिर्गी के बारे में समाज में फैली भ्रांतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है और इसका इलाज संभव है। उन्होंने बताया कि मिर्गी के दौरान मरीज को न तो किसी परिधीय इलाज की आवश्यकता होती है, जैसे कि जूता सुंघाना या खटमल खिलाना, बल्कि इसका इलाज चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाइयों से किया जाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि 85 प्रतिशत मिर्गी के मरीजों को सिर्फ 30 सेकेंड तक झटके आते हैं और फिर वे सामान्य रूप से होश में आ जाते हैं। इसके बावजूद, मिर्गी के मरीजों को कभी अकेले नहीं छोड़ना चाहिए और यदि वे झटके खाते हैं तो उन्हें करवट लिटा देना चाहिए, उनकी कमीज़ ढीली कर देनी चाहिए और झटके के दौरान वीडियो बनाकर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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Epilepsy awareness rally held at Banaras Hindu University (BHU)

पैरामेडिकल स्टाफ को मिलेगा मिर्गी के लक्षण पहचानने का प्रशिक्षण
प्रोफेसर विजयनाथ मिश्र ने यह भी बताया कि विभाग, जिला प्रशासन के सहयोग से पैरामेडिकल स्टाफ को मिर्गी के लक्षण पहचानने और मरीजों को सही तरीके से उपचार देने के लिए प्रशिक्षण देने जा रहा है। उन्होंने कहा कि न्यूरोलॉजी विभाग पिछले 14 वर्षों से पूर्वांचल के विभिन्न हिस्सों में जनजागरूकता कार्यक्रम चला रहा है और मिर्गी के प्रति लोगों के दृष्टिकोण को बदलने के लिए निरंतर काम कर रहा है।

“मिर्गी नहीं है लाइलाज” – मरीजों के प्रति सहानुभूति का संदेश
कार्यक्रम में, प्रोफेसर विजयनाथ मिश्र ने मिर्गी के मरीजों के प्रति समाज के रवैये को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कई बार मिर्गी के दौरे के कारण लड़के-लड़कियों की शादी टूट जाती है और मरीजों को समाज में घृणा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मिर्गी के मरीजों के साथ घृणा नहीं, बल्कि सहानुभूति और सहयोग की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के अंत में, आईएमएस निदेशक प्रोफेसर एस. शंखवार ने बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग की ओर से किए जा रहे जागरूकता प्रयासों की सराहना की और भविष्य में और अधिक शोध और जनजागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन के लिए प्रोत्साहित किया।

Epilepsy awareness rally held at Banaras Hindu University (BHU)

“राष्ट्रीय मिर्गी दिवस” और न्यूरोलॉजिस्ट अवेयरनेस मंथ
प्रोफेसर विजयनाथ मिश्र ने यह भी बताया कि 17 नवम्बर को “राष्ट्रीय मिर्गी दिवस” के रूप में मनाया जाता है और पूरा महीना न्यूरोलॉजिस्ट अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर मिर्गी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

इस रैली और जागरूकता अभियान के माध्यम से बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग ने समाज में मिर्गी को लेकर गलत धारणाओं को तोड़ने और मिर्गी के मरीजों के प्रति सहानुभूति और समझ बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

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