कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय मे स्वामी विवेकानंद जयंती पर ग्रंथ-अध्ययन कार्यशाला

स्वामी विवेकानंद ने भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा दी – प्रो. पराग जोशी

युवा दिवस विशेष |

स्वामी विवेकानंद जयंती, माँ जिजाऊ जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के IKS सेंटर और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के संयुक्त तत्वावधान में भारत बोध प्रज्ञा प्रवाह ग्रंथ-अध्ययन कार्यशाला का भव्य उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर संस्कृत भाषा एवं साहित्य विभागाध्यक्ष प्रो. पराग जोशी का विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद एवं माँ जिजाऊ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर तथा दीप प्रज्वलन द्वारा हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता परमपूज्य गोलवलकर गुरुजी शैक्षणिक परिसर के प्रमुख प्रो. हरेकृष्ण अगस्ती ने की। कार्यक्रम का प्रास्ताविक राष्ट्रीय सेवा योजना के निदेशक डॉ. जयवंत चौधरी ने प्रस्तुत किया।

प्रास्ताविक में डॉ. चौधरी ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी आंतरिक क्षमताओं का विकास, मानसिक स्वास्थ्य का पोषण, आत्मविश्वास और निर्भयता का निर्माण करना चाहिए। एकाग्रता एवं लक्ष्य-केन्द्रित दृष्टिकोण व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय मे स्वामी विवेकानंद जयंती पर ग्रंथ-अध्ययन कार्यशाला

विशेष व्याख्यान – प्रो. पराग जोशी

मुख्य वक्ता प्रो. पराग जोशी ने अपने प्रेरणादायी व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन-चरित्र प्रत्येक युवा को अवश्य पढ़ना चाहिए। उन्होंने भारतीय संस्कृति का गौरव विश्व मंच पर स्थापित किया और युवाओं को स्वाभिमान, कर्तृत्व और चरित्र निर्माण का मंत्र दिया।

प्रो. जोशी ने कहा कि आत्मविश्वास, राष्ट्रभक्ति और मानव सेवा पर आधारित स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा दिखाते हैं। अनुशासन, कर्तव्यबोध और राष्ट्रसेवा से युक्त युवा पीढ़ी ही भारत को महाशक्ति बना सकती है। ऊर्जा, विचार और परिवर्तन की क्षमता से युक्त युवा ही राष्ट्र की सच्ची नींव हैं।


अध्यक्षीय भाषण

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. हरेकृष्ण अगस्ती ने माँ जिजाऊ के त्याग और मातृत्व का उल्लेख करते हुए उन्हें आदर्श माता एवं गुरु के रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन NSS की छात्रा ईशा मशानकर ने किया।


21 दिवसीय ‘भारत बोध प्रज्ञा प्रवाह’ ग्रंथ-अध्ययन कार्यशाला का उद्घाटन

युवा दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए NSS एवं IKS सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में भारत बोध ज्ञान प्रवाह नामक 21 दिवसीय ग्रंथ-अध्ययन कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस कार्यशाला में विद्याभारती द्वारा प्रकाशित भारत बोध प्रज्ञा प्रवाह ग्रंथमाला की पुस्तकों का अध्ययन कर विद्यार्थी अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

उद्घाटन सत्र में प्रथम व्याख्यान ज्योतिष विभाग के विद्यार्थी विष्णुवर्धन ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रो. हरेकृष्ण अगस्ती ने कहा कि यह उपक्रम स्वामी विवेकानंद के ‘शिक्षा के माध्यम से आत्मविकास’ के विचार को साकार करने वाला सराहनीय प्रयोग है।

Book Study Workshop on Swami Vivekananda Jayanti at Kavikulguru Kalidas Sanskrit University
Book Study Workshop on Swami Vivekananda Jayanti at Kavikulguru Kalidas Sanskrit University

इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, लेखन एवं वक्तृत्व कौशल विकसित करना तथा उन्हें निर्भीक और स्पष्ट विचारों वाला नागरिक बनाना है।

यह उपक्रम IKS सेंटर की प्रमुख प्रो. कलापिनी अगस्ती तथा NSS समन्वयक डॉ. जयवंत चौधरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। समापन अवसर पर प्रो. हरेकृष्ण अगस्ती एवं प्रो. पराग जोशी के शुभहस्ते सभी सहभागी विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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